Hindi gazal-Mein khud bhi

Mein khud bhi kab ye kehta hoon koi sabab nahi

Tu sach hai mujhko chhod bHindi gazal-Mein khud bhihi de to koi ajab nahi

Wapas jo chaho jana to jaa sakte ho magar

Ab itni door aa gaye hum’ dekho ab nahi

Zar ka’ zaroorto ka’ zamane ka’ dosto

karte to hum bhi hai magar itna adab nahi

Mera khuloos hai to hamesha ke waaste

Tera karam nahi hai ki ab hai aur ab nahi

Aaye wo rozo shab ki jo chaahe thhe rozo shab

To mere rozo shab bhi mere rozo shab nahi

Duniya se kya shikayte logon se kya gila

Humko hi zindagi se nibhane ka dhab nahi

में खुद भी कब ये कहता हूँ कोई सबब नहीं 

तू सच है मुझको छोड़ भी दे तो कोई अजब नहीं 

वापस जो चाहो जाना तो जा सकते हो मगर 

अब इतनी दूर आ गए हम, देखो अब नहीं 

ज़ार का, ज़रूरतों का, ज़माने का, दोस्तों 

करते तो हम भी है मगर इतना अदब नहीं 

मेरा ख़ुलूस है तो हमेशा के वास्ते 

तेरा करम नहीं है की अब है और अब नहीं 

आए वो रोज़ो शब् की जो चाहे थे रोज़ो शब् 

तो मेरे रोज़ो शब् भी मेरे  शब् नहीं 

दुनिया क्या शिकायते लोगों से क्या गिला 

हमको ही ज़िन्दगी से निभाने का ढब नहीं 

Hindi gazal-Naa khushi de

ना ख़ुशी दे तो कुछ दिलासा दे 

दोस्त, जैसे हो मुझको बेहला दे 

आगही से मिली है तन्हाई 

आ मेरी जान मुझको धोखा दे 

अब तो तकमील की भी शर्त नहीं 

ज़िन्दगी अब तो एक तमन्ना दे

ऐ सफर इतना रायगा तो ना जा 

ना हो मंज़िल कहीं तो पंहुचा दे 

तर्क करना है गर तअल्लुक़ तो 

खुद ना जा तू किसी से कहला दे  

Hindi gazal-yakeen ka silsila

यकीन का अगर कोई भी सिलसिला नहीं रहा  

तो शुक्र कीजिये की कोई भी गिला नहीं रहा 

ना हिज्र है ना वस्ल है अब इसको कोई क्या कहे 

की फूल शाख पर तो है मगर खिला नहीं रहा 

ख़ज़ाने तुमने पाए तो ग़रीब जैसे  हो गए 

पलक पे अब कोई भी मोती झिलमिला नहीं रहा 

बदल गयी है ज़िन्दगी बदल गए हैं लोग भी 

ख़ुलूस का जो था कभी वो अब सिलसिला नहीं रहा 

जो दुश्मनी बख़ील  से हुई तो इतनी ख़ैर है 

 की ज़हर उसके पास है मगर पीला नहीं रहा 

लहू में जज़्ब हो सका ना इल्म तो ये हाल है 

कोई सवाल ज़हन को जो दे जिला, नहीं रहा 

 

 

Painful shayari-Humne dhoondhe bhi to

Humne dhoondhe bhi to dhoondhe hai sahare keise

In sarabon pe koi umar guzare keise

Haath ko haath nahi soojhe wo taareeki thhi

Aa gaye haath mein kya jaane sitaare keise

Har taraf sjhor usi naam ka hai duniya mein

koi usko jo pukare to pukare keise

Dil bujha jitne armaan thhe sab khaak hue

Raakh mein phir ye chamakte hain sharare keise

Na to dum leti hai tu aur na hawa thamti hai

Zindadgi zulf tiri  koi saware keise