Hindi gazal-Dil ka har dard

दिल का हर दर्द खो गया जैसे 

में तो पत्थर का हो गया जैसे 

दाग बाक़ी नहीं की नक़्श कहूँ 

कोई  दीवार  धो  गया   जैसे 

जागता ज़हन ग़म की धुप में था 

छाँव पाते ही सो गया जैसे 

देखने वाला था कल उसका तपाक 

फिर से वो ग़ैर हो गया जैसे 

कुछ बिछड़ने के भी तरीके हैं 

खेर जाने दो जो गया जैसे 

 

Painful shayari-ajab dorahe pe zindagi

Ajab dorahe pe zindagi hai kabhi hawas dil ko kheechti hai

Kabhi ye sharmindagi hai dil mein ki itni fikre maash kyun hai

Na koi fikr na justuju hai na khwab hai koi na aarzoo

Ye shaqs to kab ka mar chuka hai to bekafan phir ye laash kyun hai

 

अजब दोराहे पे ज़िन्दगी है कभी हवस दिल को खींचती है

कभी ये शर्मिंदगी है दिल में की इतनी फिकरे मार्श क्यों है

ना कोई फ़िक्र न जुस्तुजू है ना ख्वाब है न कोई आरज़ू

ये शक़्स तो कब का मर चूका है तो बेकफन फिर ये लाश क्यों है

Painful shayari-kabhi kabhi

Kabhi kabhi mein ye sochta hoon ki mujhko teri talaash kyun hai

Ki jab toote hain saare taar to saaz mein irte-aash kyun hai

Koi agar poochhta ye humse batate gar to hum kya batate

Bhala ho sabka ki ye na poochha ki dil pe aisi kharash kyun hai

 

कभी कभी में ये सोचता हूँ की मुझको तेरी तलाश क्यों है

की जब टूटे है सारे तार तो साज़ में इरतआश क्यों है

कोई अगर पूछता ये हमसे बताते गर तो हम क्या बताते

भला हो सबका की ये न पूछा की दिल पे ऐसी खराश क्यों है