Hindi gazal-Dard kuchh din

दर्द कुछ दिन तो मेहमाँ ठहरे 

हम बज़िद हैं की मेज़बान ठहरे 

सिर्फ  तन्हाई  सिर्फ  वीरानी 

ये नज़र जब उठे जहां ठहरे 

कोनसे ज़ख्म पर पड़ाव किया

दर्द के काफिले  कहाँ   ठहरे 

कैसे दिल में ख़ुशी बसा लूँ में 

कैसे मुट्ठी में ये धुंआ ठहरे 

थी कही मस्लेहत कहीं जुरअत 

हम कहीं इनके दरमियाँ ठहरे 

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