Hindi gazal-yakeen ka silsila

यकीन का अगर कोई भी सिलसिला नहीं रहा  

तो शुक्र कीजिये की कोई भी गिला नहीं रहा 

ना हिज्र है ना वस्ल है अब इसको कोई क्या कहे 

की फूल शाख पर तो है मगर खिला नहीं रहा 

ख़ज़ाने तुमने पाए तो ग़रीब जैसे  हो गए 

पलक पे अब कोई भी मोती झिलमिला नहीं रहा 

बदल गयी है ज़िन्दगी बदल गए हैं लोग भी 

ख़ुलूस का जो था कभी वो अब सिलसिला नहीं रहा 

जो दुश्मनी बख़ील  से हुई तो इतनी ख़ैर है 

 की ज़हर उसके पास है मगर पीला नहीं रहा 

लहू में जज़्ब हो सका ना इल्म तो ये हाल है 

कोई सवाल ज़हन को जो दे जिला, नहीं रहा